चमोली, 17 अक्टूबर। आज शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त में चमोली जिले में स्थित पंच केदारों में से चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए पूर्ण विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गई है, जहां अगले छह माह तक भगवान के दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहेगा.
### 🛕 पूजन और कपाट बंद होने की प्रक्रिया
रुद्रनाथ मंदिर में आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही प्रातःकालीन अभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न कराई गई अंतिम पूजा के उपरांत, सुबह करीब 6 बजे मंदिर के कपाट शीतकालीन प्रवास के लिए पूरी तरह बंद कर दिए गए।
इस दौरान मंदिर परिसर सैकड़ों श्रद्धालुओं की भक्तिमय जयजयकार से गूंज उठा, जिन्होंने इस पावन अवसर पर स्वयं को धन्य माना। कपाट बंद होने के पश्चात, करीब साढ़े सात बजे भगवान रुद्रनाथ की सजधज के साथ निकली उत्सव विग्रह डोली को भक्तों की उपस्थिति में गोपीनाथ मंदिर के लिए विदाई दी गई।
### 🚶 डोली की शीतकालीन यात्रा का मार्ग
भगवान रुद्रनाथ की डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए लगभग 18 किलोमीटर का पैदल मार्ग तय करेगी। यह डोली रुद्रनाथ से प्रस्थान करने के बाद *पंचगंगा, पितृधार, पनार बुग्याल* से होते हुए *मोली बुग्याल* पहुंचेगी, जहां भगवान को इस सीजन के नए अनाजों से बना *राजभोग* लगाया जाएगा।
इसके पश्चात, डोली *सगर गांव* होती हुई आज सूर्यास्त से पूर्व *गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर* पहुंच जाएगी। वहां पहुंचने पर पुनः भोग लगाने के बाद भगवान रुद्रनाथ की डोली अगले छह माह तक गोपीनाथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान रहेगी।
### ❄️ शीतकालीन प्रवास की परंपरा
उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में स्थित अधिकांश मंदिर भारी हिमपात और कठोर मौसम के कारण शीत ऋतु में बंद रहते हैं। इस दौरान देवताओं की पूजा-अर्चना का क्रम निचले क्षेत्रों में स्थित उनके शीतकालीन मंदिरों में जारी रहता है। रुद्रनाथ मंदिर, जो *समुद्र तल से 3,600 मीटर (लगभग 11,808 फीट)* की ऊंचाई पर स्थित है, में भगवान शिव के *मुख (एकानन)* की पूजा होती है। यह मंदिर अपनी दुर्गम और रमणीक यात्रा के लिए विख्यात है।
### 🗓️ अन्य केदारों के कपाट बंद होने की तिथियां
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही पंच केदारों में शीतकालीन प्रवास की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। अन्य केदारों के कपाट बंद होने की तिथियां इस प्रकार हैं:
| *मंदिर* | *कपाट बंद होने की तिथि* |
| :— | :— |
| *मध्यमेश्वर (द्वितीय केदार)* | 20 नवंबर 2024 |
| *तुंगनाथ (तृतीय केदार)* | 4 नवंबर 2024 |
| *कल्पेश्वर (पंचम केदार)* | साल भर खुला रहता है |
कपाट बंद होने के बाद रुद्रनाथ मंदिर को *मंदार (बुखला) के 251 पुष्प गुच्छों* से ढक दिया गया है, जो अगले वर्ष कपाट खुलने पर श्रद्धालुओं को प्रसाद रूप में वितरित किए जाएंगे। अगले छह माह तक भक्त गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में ही भगवान रुद्रनाथ के दर्शन-पूजन कर सकेंगे। मान्यता है कि अगले वर्ष मई माह में शुभ मुहूर्त में कपाट पुनः खुलने के साथ ही रुद्रनाथ धाम की यात्रा का नया सीजन प्रारंभ होगा।
